हिंदी भाषा की गंगोत्री हैं माधवराव सप्रेः गिरीश पंकज
20-Jun-2026
- महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी सभागृह में आयोजित पंडित सप्रे जयंती को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार ने दी कई अहम जानकारी
रायपुर। साल 1900 में छत्तीसगढ़ के पेंड्रा जैसे दूरस्थ क्षेत्र से हिंदी भाषा की पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ निकालने वाले पंडित माधवराव सप्रे की पत्रकारिता शुद्धता, पवित्रता और शुचिता की प्रतीक थी। भले ही उन्होंने बेहद विपरीत परिस्थितियों में मात्र तीन वर्ष छत्तीसगढ़ मित्र का प्रकाशन किया हो। दरअसल माधवराव सप्रे हिंदी भाषा की गंगोत्री हैं। उनसे प्रभावित होकर कई साहित्यकारों और पत्रकारों ने लेखन किया। महाराष्ट्र मंडल के य.गो. जोगलेकर स्मृति शिवाजी महाराज सभागृह में आयोजित पंडित सप्रे जयंती पर विशिष्ट अतिथि की आसंदी से वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज ने इस आशय के विचार व्यक्त किए।
गिरीश ने कहा कि माधवराव सप्रे बेहद दूरदृष्टि वाले पत्रकार थे। 100 साल पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ की परिकल्पना कर ली थी और ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ निकाला। इसी तरह 20वीं सदी के शुरूआती वर्षों में ही माधवराव सप्रे ने अंग्रेजों के खिलाफ अपनी पत्रकारिता में सबसे पहले बायकाट का नारा बुलंद किया था। उसके कई दशकों के बाद महात्मा गाधी ने इसी नारे को आगे बढ़ाया था। कालजयी कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ लिखने वाले माखनलाल चतुर्वेदी उनके सानिध्य में ही चमके और उन्होंने ‘कर्मवार’ पत्रिका का प्रकाशन किया। पंडित सप्रे की महत्वपूर्ण विशेषता का उल्लेख करते हुए गिरीश पंकज ने कहा कि माधवराव सप्रे की अनुवाद शैली सर्वोत्कृष्ट थी। मराठी के सुप्रसिद्ध ‘दासबोध’ से लेकर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई महत्वपूर्ण लेख का उन्होंने हिंदी में अनुवाद किया।
अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार डा. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि पंडित माधवराव सप्रे की पत्रकारिता स्वदेश, स्वदेशी और स्वभाषा के लिए थी। वे ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ के माध्यम से भी शिक्षा, महिला उत्थान और चिकित्सा के पक्षधर थे। पंडित सप्रे की दूरदृष्टि पर टिप्पणी करते हुए डा. त्रिवेदी ने कहा कि हाल ही में टाइम्स आफ इंडिया ने देश की पहली महिला डाक्टर आनंदी बाई पर पूरा एक पेज निकाला। जबकि 1902 में सप्रे जी ने ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ में यह काम पहले ही कर लिया था।
पंडित सप्रे की एक और विशेषता पर चर्चा करते हुए डा. त्रिवेदी ने बताया कि एक बार भारत देश की अर्थ व्यवस्था पर उन्होंने काफी कुछ लिखा लेकिन अपने ही लिखे लेख से वे संतुष्ट नहीं थे जबकि यही लेख महावीर प्रसाद द्विवेदी के हाथों में लगा तो उन्होंने इसमें किंचित सुधारकर इसे प्रकाशित कर दिया। भारत देश के इतिहास में अर्थ व्यवस्था की पहली पुस्तक होने का दर्जा प्राप्त है। माधवराव की पत्रकारिता सत्य समाचार, शुद्ध भाषा के साथ लिखा गया समाचार और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर लिखा गया समाचार पर आधारित थी।
अपने संक्षिप्त अध्यक्षीय उद्बोधन में मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि डा. सुधीर शर्मा की लिखी पुस्तक ‘व्यक्तित्व विकास में पंडित माधवराव सप्रे की भूमिका’ के कवर पेज पर पंडित सप्रे की सुक्ति ‘व्यक्ति का विकास, समाज का विकास और समाज का विकास राष्ट्र के विकास से है’ महाराष्ट्र मंडल के लिए गत 91 वर्षों से प्रेरक रहा है। मंडल भी व्यक्ति विकास पर जोर देता है। क्योंकि इसी से समाज का विकास निर्भर है और समाज के विकास से राष्ट्र का विकास। पंडित सप्रे का व्यक्तित्व हमें अपनी युवा पीढ़ी, अपने समाज और अपने देश के लिए संघर्ष करना सिखाता है। महाराष्ट्र मंडल, छत्तीसगढ़ मित्र और छत्तीसगढ़ साहित्य व संस्कृति संस्थान रायपुर के संयुक्त आयोजन पंडित सप्रे जयंती समारोह में मंच का संचालन डा. सुधीर शर्मा और आभार प्रदर्शन रविंद्र ठेंगड़ी ने किया।
