न्यूज़

बाल संस्कार शिविर के बच्चे बोले- कैसे बीता एक माह पता ही नहीं चला

बाल संस्कार शिविर के बच्चे बोले- कैसे बीता एक माह पता ही नहीं चला

 - एक माह तक चले शिविर में बच्चों ने किया खूब एजाय

रायपुर। स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां लगने के बाद बच्चों को महाराष्ट्र मंडल की एक माह तक चलने वाली बाल संस्कार शिविर का बेसब्री से इंतजार था, अब एक माह बीत जाने के बाद बच्चे सिर्फ यही कह रहे है कि कैसे पूरा एक महीना बीत गया, पता ही नहीं चला। आनलाइन और आफलाइन दोनों की ही क्लासेस में बच्चों ने बहुत कुछ सीखा और संस्कारों का आत्मसात किया।

बाल संस्कार शिविर में आनलाइन और आफलाइन दोनों क्लास अटेंड करने वाली विट्ठल दास थान्वी और ममता थान्वी की बेटी धैर्या थान्वी ने बताया उनसे पिछले वर्ष भी एक माह क्लास अटेंड किया था। इस वर्ष स्कूल की छुट्टी लगने के साथ कैंप का बेसब्री से इंतजार था। योग और आध्यात्म से जुड़ी एक्टिविटी के साथ माइंड गेम खेलने में ज्यादा मजा आया। रामरक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा का नियमित अभ्यास काफी अच्छा रहा। मुझे आनलाइन शिविर से ज्यादा मजा आफलाइन शिविर में आया।

नियमित रुप से आनलाइन और आफलाइन संस्कार शिविर ज्वाइन करने वाले डा. भूषण कुलकर्णी और डा. एकता कुलकर्णी के पुत्र अहान भूषण कुलकर्णी ने कहा कि  उन्होंने वर्ष 2025 में भी एक माह का क्लास ज्वाइन किया था। इस वर्ष शिविर का उन्हें इंतजार था। गर्मी की छुट्टियों में हनुमान चालीसा, रोचक कहानियां श्लोक और संस्कार सीखने का मार्गदर्शन गुरुजनों से मिला। यहां हमने अच्छी आदतें, बड़ों का सम्मान करना, समय का महत्व और संस्कारों के बारे में बहुत कुछ सीखा। हमारी गुरु मंजुषा मरकळे ने हमें बहुत प्रेम, धैर्य और स्नेह से मार्गदर्शन किया।

शिविर में शामिल होने वाली महेश यशवंतराव शिरसाळे और कविता महेश शिरसाळे की सात वर्षी पुत्री श्रावणी और तीन वर्षीय पुत्री अवनी शिरसाळे ने कहा कि वे पिछले दो साल से इस कैंप में शामिल हो रहे है। उन्हें राम रक्षा और श्रीमद् भगवत गीता का पाठ सिखाया गया। साथ ही, अलग-अलग भजन भी सिखाए गए। पंचतंत्र की कहानियां सुनाई गईं। फायरलेस कुकिंग काफी अच्छा रहा। शिक्षकों ने हमें प्यार से समझाया और हर दिन कुछ नया सिखाया। इस शिविर में आकर हम दोनों बहनों का आत्मविश्वास बढ़ा और हमें अच्छे मित्र भी मिले। हम आगे भी ऐसे संस्कार शिविर में भाग लेगें।

हेमंत कुमार कुंबलकर और शीतल कुंबलकर की बेटी आरूषि ने अपने कैंप के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि शिविर में कराई गई सभी गतिविधियां मजेदार और ज्ञानवर्धक रही। बात योग और आध्यात्म की हो या खेल की। आफलाइन शिविर में कराए गए खेल और माइंड गेम काफी रोचक थे। मिट्टी की मूर्तियों को आकार देने का कार्य भी मैंने रुचि के साथ किया। आयोजकों और शिक्षिकों का व्यवहार बहुत सहयोगी था। समय का बहुत अच्छा उपयोग हुआ।

कक्षा तीसरी के छात्र आनंद और श्वेता कुसरे के पुत्र अर्नव कुसरे भी शिविर में आकर काफी खुश नजर आए। अर्नव ने कहा कि संस्कार शिविर में हमने इस साल भगवत गीता के श्लोक 12और 15 अध्याय , रोचक कहानियां नए-नए गेम्स, का मजा लिया, मुझे ऑफलाइन और ऑनलाइन क्लास दोनों बहुत अच्छा लगे, बहुत कुछ सीखने मिला, इसी तरह हर साल एक शिविर हो और हम ज्वॉइन करें,नई-नई चीज और सीखें‌. धन्यवादll