100 से अधिक बच्चों ने बनाए मिट्टी के गणेश... पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
- महाराष्ट्र मंडल में हुई सीड बाल वाले गणेश जी बनाने की कार्यशाला
रायपुर। स्कूलों में बच्चे मार्केट में मिलने वाले क्ले से खेलते है और तरह तरह के डिजाइन बनाते है, ऐसे में अगर उन्हें मिट्टी से मूर्तियां बनाने का मौका मिले तो वे कहां पीछे रहने वाले है। महाराष्ट्र मंडल आयोजित ‘मिट्टी के गणेश’ की कार्याशाला में पहुंचे 100 से अदिक बच्चों ने अपनी-अपनी प्रतिभा के अनुरुप गणेश की प्रतिमा को आकार दिया। जैसे जैसे प्रतिमा आकार लेती गई बच्चों का उत्साह बढ़ता है। बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने सभी बच्चों से मुलाकात की और उनसे बात भी की।

मंडल द्वारा 13 वर्षों से चली आ रही परंपरा में इस वर्ष भी बच्चों के साथ बड़ों में खासा उत्साह नजर आया। बच्चों ने जहां बाल गणेश को आकार दिया वहीं बड़े बुजुर्गों ने भगवान की अभय मुद्रा और बाल कृष्ण जैसे रूपों को साकार किया। बच्चों का मार्गदर्शन आर्टिसन अजय पोतदार ने किया। उनका साथ सोनल फडणवीश और शेखर क्षीरसागर ने किया।

महाराष्ट्र मंडळ ने 6 सितंबर को बच्चों को मिट्टी के श्रीगणेश की प्रतिमा बनाने की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। लगातार 13 वर्षों से चल रहे इस काम में इस वर्ष भी 100 से अधिक बच्चों ने अपनी भागीदारी निभाई। बच्चों ने मिट्टी से श्री गणेश को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया। खुद से मिट्टी के गणेश बनाकर बच्चों में अच्छी खासी खुशी देखी गई।

अजय ने बताया कि मिट्टी मंडळ की ओर से उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने बताया कि मिट्टी से श्रीगणेश की प्रतिमा बनाने के लिए सर्वप्रथम कुल मिट्टी को पांच बराबर भागों में बांटा गया। पहले भाग से प्रतिमा के लिए बेस तैयार किया गया। दूसरे भाग से भगवान का पेट वाला हिस्सा तैयार किया गया। तीसरे भाग से भगवान का सिर और शूड तैयार किया गया। चौथे भाग के दो हिस्से कर दोनों पैर बनाए गए। पांचवें भाग के चार हिस्से कर श्रीगणेश के चारों हाथ तैयार किए गए। मिट्टी को पांच बराबर हिस्सों में इसलिए बांटा गया ताकि प्रतिमा के सारे अंग बराबर बने कोई मोटा पतला न हो।

