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‘मैं अनिकेत हूं’ के क्लाइमेक्स ने सिम्स सभागार में बैठे दर्शकों को चौंकाया

 ‘मैं अनिकेत हूं’ के क्लाइमेक्स ने सिम्स सभागार में बैठे दर्शकों को चौंकाया

रायपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर शहर के सिम्स सभागार में रविवार को मंचित हुए हिंदी नाटक मैं अनिकेत हूं ने दर्शकों को भावनाओं, रोमांच और सामाजिक सरोकारों का अनुभव दिया। एक ओर जहां आईपीएल का फाइनल मैच चल रहा था, उस बीच सिम्स आडिटोरियम में लोगों की भीड़ यह साबित कर रही थी, कि बिलासपुर शहर में नाटकों का क्रेज और भविष्य उज्ज्वल है, बशर्ते नाटक सीधे तौर पर रोचक और जनमानस से जुड़ा हो।

आईपीएल के फाइनल मैच होने के बाद भी सिम्स का सभागार रंगकर्मियों, कला प्रेमियों और दर्शकों से खचाखच भरा रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिम्स के अधिष्ठाता डा. रमणेश मूर्ति थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कलेक्टर संजय अग्रवाल ने की, जबकि पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह विशिष्ट अतिथि के रुप में मौजूद रहे।  कार्यक्रम का आयोजन जीआई हेल्थ फाउंडेशन बिलासपुर द्वारा किया गया। जबकि संस्कार भारती, श्री हैरिटेज और आल रोटरी क्लब्स आफ बिलासपुर सह आयोजक रहे।

 

नाटक में अनिकेत की केंद्रीय भूमिका निभाने वाले निर्देशक शशि वरवंडकर ने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। तेज तर्रार भारद्वाज वकील की भूमिका में चेतन दंडवते ने अपने ओजस्वी संवादों और प्रस्तुति से अमिट छाप छोड़ी। अनिकेत की पत्नी का किरदार डा. अनुराधा दुबे ने मंच पर सशक्त अभियन किया। वहीं धर्मा के किरदार में पहुंचे रविंद्र ठेंगड़ी ने अपने हास्य अभिनय से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं सावित्री बाई जाधव के रोल में भारती पलसोदकर ने भी अपने अभिनय से सभी का दिल जीत लिया। अंतिम गवाही के रुप में कोर्ट रूम में पहुंचे डा. गजानन ब्रह्मानंद शिरोड़कर यानी आचार्य रंजन मोड़क ने मामले में इतनी गंभीरता ला दी कि दर्शक यह सोचने को मजबूर हो गए कि सामने कठघरे में खड़ा व्यक्ति अनिकेत है या शशिकांत जाधव।